चिन्तन
आचार्य चाणक्य की कुछ रोचक बातें
<p>चाणक्य का जन्म प्राचीन भारत में ईसा पूर्व 350 को हुआ उनके जन्मस्थान को लेकर आज भी विवाद चल रहा है कुछ लोगो का ऐसा मानना है की उनका जन्म तक्सिला में हुआ था और कुछ लोगो का मानना है की उनका जन
• चाणक्य का जन्म प्राचीन भारत में ईसा पूर्व 350 को हुआ. उनके जन्मस्थान को लेकर आज भी विवाद चल रहा है. कुछ लोगो का ऐसा मानना है की उनका जन्म तक्सिला में हुआ था और कुछ लोगो का मानना है की उनका जन्म दक्षिण भारत में हुआ था.
• उनके पिता का नाम कानीन (या चनक) और उनकी माता का नाम कानेस्वरी था. उनका नाम उनके पिता के नाम से ही लिया गया है.
• चाणक्य की बुद्धिमत्ता के बदौलत उस समय मौर्य साम्राज्य सबसे विशाल साम्राज्य बन चूका था.
• बाद में चाणक्य ने चन्द्रगुप्त के बेटे बिन्दुसार को मौर्य साम्राज्य का उत्तराधिकारी बनाया. चन्द्रगुप्त के बाद बिन्दुसार के भी चाणक्य राजनैतिक सलाहकार थे.
• चाणक्य अर्थशास्त्र और चाणक्य-निति के लेखक है, अर्थशास्त्र इकनोमिक पर लिखी उनकी किताब है. किताब में लिखी उनकी बात को लोग आज बी अपने जीवन में अपनाते है. चाणक्य निति में उन्होंने अपने विचारो को व्यक्त किया है.
• चाणक्य के जीवन पर काफी सेरिअल्स और फिल्मे बनाई गयी है. जैसे की चाणक्य (टीवी सीरियल), चन्द्रगुप्त मौर्य (तेलगु फिल्म). चाणक्य निति पर बहोत सी किताबे भी लिखी गयी है.
• चाणक्य एक ब्राह्मण है इसी वजह से उन्होंने अपनी पढाई प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालय तक्षशिला से शिक्षा ग्रहण की. बाद में वे तक्षशिला के ही शिक्षक भी बने.
• ब्राह्मण होने की वजह से उनमे एक शासक बनने के सारे गुण थे. वे दिखने में भले ही अच्छे नही थे लेकिन ज्ञान का मामले में उनका कोई जवाब नही था.
• उन्होंने अपने सही राजा को ढूंडना तब शुरू किया जब नंदा साम्राज्य के राजा धनानंदा ने उन्हें अपमानित किया और उन्हें राजसी दरबार से बाहर निकाला. उनकी जब तभी पूर्ण हुई जब वे चन्द्रगुप्त मौर्य से मिले. उस समय चन्द्रगुप्त मौर्य काफी किशोर थे (उनकी आयु 12-13 वर्ष ही रही होगी). चाणक्य ने उन्हें कम उम्र में ही शासन करने का और समाज कल्याण करने का पाठ पढाया. बाद में मौर्य ने नंदा साम्राज्य का विनाश कर के मौर्य साम्राज्य स्थापित किया. और चन्द्रगुप्त मौर्य, मौर्य साम्राज्य के पहले शासक बने.
• चाणक्य की मृत्यु ईसा पूर्ण 280 BC में हुई. उनकी मृत्यु को लेकर इतिहास में बहोत सी कहानिया प्रचलित है. कुछ लोगो का ऐसा कहना है की सन्यास लेने के बाद वे जंगल चले गये थे और वही उनकी मृत्यु हो गयी और कुछ का ऐसा मानना है की बिन्दुसार के दरबार में किसी से आपसी मतभेद के कारण उनकी मृत्यु हुई.