चिन्तन मन्थन
22 Feb 2022
नरेन्द्र कुमार दीक्षित
जलेसर (एटा)
292
कविता
जब कठिन समय पर अपनों के,किरदार बदलते दिखते हों ।
और बात बात पर अपनों के ,व्यवहार बदलते दिखते हों ।
तो आवश्यक चिन्तन मन्थन है ,हुई भूल कहाँ कब कैसे क्यों ?
यदि ईर्ष्याभाव और स्वार्थभाव ,उनके मन में नहीं पलते हों।।1
---- नरेन्द्र कुमार दीक्षित ,जलेसर ।