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जन्म दिवस मनाने का महत्व हमारा वैदिक इतिहास

जन्म दिवस मनाने का महत्व

23 Aug 2021 Dr. shree ram sharma ji Agra 469

<p>हमारे सनातन धर्म में, वैदिक धर्म में यह मान्यता है कि , इस धरा पर आने वाले जीव को 12 मास , और सौर मंडल के 12 राशि, 9 ग्रह , 27 नक्षत्र और उनके चार चरण में वास, के शुभ अशुभ फल को भोगना ही पड़ता है।</p>

सभी जानते है, जीव पर उसके जीवन में, उसके जन्म के समय का मास,  राशि, नक्षत्र और ग्रह के प्रभाव से ही , उसके जीवन का पथ बनता है,  भविष्य का निर्माण होता है। तारीख तो सिर्फ लौकिक व्यवहार तक ही सीमित रहती है।

हमारे जातक (जन्म पत्रिका) जो जन्म समय को लेकर बनाये जाते है,  वह उस समय सौर मंडल स्थित मास,  राशि , ग्रह की स्थिति , नक्षत्र , साथ ही नक्षत्र कौन से चरण में है, कौन सा ग्रह किस राशि में स्थित है, जातक की राशि से मित्र है या शत्रु है, यह सब देख कर , गणना कर बनाई जाती है। यहां आंग्ल तारीख का कोई महत्व नही रहता।

वर्तमान के लौकिक व्यवहार में आंग्ल तारीख ही व्यवहार में आती है, भारतीय मिति, मास और नक्षत्र तो वार त्योहार तक ही सीमित रह गये। ऐसे में जग व्यवहार में भले ही जन्म दिवस आंग्ल तारीख से मनाया जाय, पर इस दिन मनाने पर , अज्ञानता वश हम इस दिन में वासित ग्रह नक्षत्र को प्रधानता दे उनके भी शुभ और अशुभ फल के भोग के भागी बनते है।

इसी कारण हमारे मनीषियों ने , मनुष्य रूप में हमे इस धरा पर भेजने भगवान को धन्यवाद देने , जन्मोत्सव , जिस मास में हमारा जन्म हुआ , और किस नक्षत्र में हुआ उस दिन मनाने की आज्ञा दी, इस दिन ही भगवान की सन्निद्धि में , अपना गोत्र , नाम और जन्म नक्षत्र कह पूजा अर्चना करनी, करवानी चाहिये। 
कारण की मास और नक्षत्र के मेल के समय सौर मंडल में राशि, ग्रह , नक्षत्र की स्थिति लगभग अपने जन्म के समय की स्थिति से मेल खाती हुई होती है, जीवन पर इनके शुभ और अशुभ फल जो जातक के अनुसार होते है, उनमें ज्यादा अंतर नही पड़ता, पर आंग्ल तारीख से मनाने पर जातक के शुभ अशुभ फल के साथ, इस तारीख के शुभ अशुभ फल भी भोग में बढ़ जाते है।

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