चिन्तन
जीवन : मीठा या खारा ?
29 Apr 2021
ANURAG TRIPATHI
Ghaziabad
712
एक बार एक परेशान और निराश व्यक्ति अपने गुरु के पास पहुंचा और बोला– “गुरूजी मैं जिंदगी से बहुत परेशान हूँ। मेरी जिंदगी में परेशानियों और तनाव के सिवाय कुछ भी नहीं है। कृपया मुझे सही राह
एक बार एक परेशान और निराश व्यक्ति अपने गुरु के पास पहुंचा और बोला– “गुरूजी मैं जिंदगी से बहुत परेशान हूँ। मेरी जिंदगी में परेशानियों और तनाव के सिवाय कुछ भी नहीं है। कृपया मुझे सही राह दिखाइये।”
गुरु ने कुछ सोचकर एक गिलास में पानी भरा और उसमें मुट्ठी भर नमक डाल दिया। फिर गुरु ने उस व्यक्ति से पानी पीने को कहा। उस व्यक्ति ने ऐसा ही किया।
गुरु– इस पानी का स्वाद कैसा है ? “बहुत ही ख़राब है” उस व्यक्ति ने कहा।
फिर गुरु उस व्यक्ति को पास के सरोवर ले गए। गुरु ने उस सरोवर में भी मुठ्ठी भर नमक डाल दिया फिर उस व्यक्ति कहा– इसका पानी पीकर बताओ की कैसा है।
उस व्यक्ति ने सरोवर का पानी पिया और बोला– गुरूजी यह पानी तो मीठा है।
गुरु ने कहा– “बेटा जीवन के दुःख भी इस मुठ्ठी भर नमक के समान ही है। जीवन में दुखों की मात्रा वही रहती है– न ज्यादा न कम। लेकिन यह हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों का कितना स्वाद लेते हैं। यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपनी सोच एवं ज्ञान को गिलास की तरह सीमित रखकर रोज खारा पानी पीते हैं या फिर उस बड़े सरोवर की तरह विशालबुद्धि बनकर मीठा पानी पीते हैं।”
सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, वह पर्याप्त है।।