"ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय | धीमहि तन्नः परशुराम: प्रचोदयात् ||"

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पुरोहित कर्म का फल

24 Jul 2019 यदुनंदन पांडेय उत्तराखंड 153

कथा और व्यथा

पंडित जी की सत्य घटना.. दो मिनट पढ़ें और अपने विचार दें. *पंडित* जी गांव मे एक यजमान के यहां सत्यनारायण कथा करके घर आए, और पत्नी सावित्री से बोले जरा एक गिलास पानी पिलाना । तभी *पंडित* जी की छोटी बेटी व बेटा दौड़ते हुए आए और बोले पापा हमारे लिए क्या लेकर आए? तो *पंडित* जी ने थैली मे रखी आटे की प्रसाद और कुछ फल बच्चो को देते हुए कहा बेटा ये लो प्रसाद तुम्हारे लिए, तो बेटी बोली पापा मिठाई नही लाए? *पंडित* जी बोले- बेटा! मिठाई यजमान लाए तो थे पर इतनी की सिर्फ वो व उनके घरवाले खा सके. हमारे लिए तो सिर्फ आटे की प्रसाद बची ये खाओ अगली बार मिठाई ले आऊंगा। तभी बेटा बोला पापा हमारे मास्टर जी कह रहे थे जल्दी स्कूल की फिस ( शुल्क ) भर दो नही तो परीक्षा में नही बैठने देंगे। दुःखी मन से पंडित जी ने कहा- बेटा! मास्टरजी से कहना जल्दी भर देंगे । तभी पंडिताईन (पत्नी) बोली- सुनते हो! दूर के रिश्तेदार के यहाँ शादी है, हमे उनको कुछ तो देना चाहिए न यदि नही देंगे तो कल को हमारे बच्चों की शादी मे नहीं आएंगे वो। *पंडित* जी की आँखों मे आंशू आ गए और बोले पंडिताईन तुम जानती हो पुरोहित कर्म करके मे तुम सबकी इच्छाएँ पूरी नहीं कर पा रहा हूँ । आज सत्यनारायण कथा करवाई बदले मे 101 /रुपये दक्षिणा दी और 50 /रुपये चढ़ावे मे आए. अब तुम ही बताओ इन 150 रुपये में बेटे की स्कूल फिस जमा करूँ या बेटी को कपड़े दिलवाऊं या रिश्तेदार की शादी के लिए सामान खरीदूँ ?? आज पैसा होता तो बेटी को सरकारी स्कूल मे नही पढ़ा रहा होता बल्कि बेटे के साथ प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता। *ब्राह्मण* कुल मे पैदा हुआ हूं यदि अपना पुरोहित कर्म छोडूं तो पुर्वजो की कीर्ति को ठेस पहूंचे और ये सब ही करता रहूं तो बच्चों के भविष्य को बिगाडूं। पंडिताईन आज हमारा दुर्भाग्य ये है कि हम गरीब हैं फिर भी लोग मुझसे कहते है जब मै पूजा करवाकर घर आता हूं तो यजमान को कितने का चूनां लगाया? ये तो प्रभु जानते हैं मैने चूनां लगाया या नहीं लगाया । हम *ब्राह्मण* हैं तो हमें राशन नहीं मिलता , *ब्राह्मण* हैं तो मेरे बच्चों को कि छात्रवृत्ति नहीं मिलती , *ब्राह्मण* हैं तो मेरे बच्चों को निःशुल्क किताबें नही मिलती , *ब्राह्मण* हैं इसलिए मेरे बच्चे की स्कूल फीस ज्यादा है । *पंडिताईन हम ब्राह्मण कुल में पैदा हुए क्या ये हमारा दोष है ???* *ब्राह्मण गरीब नही हो सकता ???* पता नहीं हम ब्राह्मणों को सब लुटेरा क्यों समझते हैं ?? हमने किसका पैसा लूटा है ?? हे प्रभु! हम कब तक ऐसे दयनीय स्थिति में रहेंगें? पंडिताईन बोली आप चिंता मत करिए ब्राह्मणो के हितैषी भगवान जानते है हमने कभी गलत नही किया, एक न एक दिन हमारा भी भला होगा आप रोइए मत मेरे पायल गिरवी रखकर बेटे की फीस भर दीजिए और शादी का सामान ले आइए , इतना कहकर पंडिताईन रसोई मे भोजन बनाने चली गई व पंडित जी बच्चों से बात करने लग गए.......। ये अधिकांश ब्राह्मणो के घर की सच्ची कहानी है । हर ब्राह्मण अमीर नही होता ये बात समाज को समझ लेना चाहिए । पंडित बालकृष्ण शास्त्री जी
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