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ब्राह्मण वीर -पुष्यमित्र शुंग इतिहास के पन्नों से

ब्राह्मण वीर -पुष्यमित्र शुंग

07 Apr 2020 archana tiwari prayagraj 709

<p><em><strong>अध्याय -2&nbsp; इतिहास के पन्नों से&nbsp;</strong></em></p> <p>&nbsp;</p>

शुंग राजवंश के संस्थापक पुष्यमित्र शुंग का जन्म ब्राह्मण, शिक्षक परिवार में हुआ था ।पुष्यमित्र शुंग ने मौर्य साम्राज्य का खात्मा कर भारत में दोबारा से वैदिक धर्म की स्थापना की थी. अशोक की मौत और वृहद्रथ के अंतिम मौर्य शासक बनने तक मौर्य साम्राज्य बेहद कमजोर हो गया था. वहीं, इस समय तक पूरा मगध साम्राज्य बौद्ध धर्म में परिवर्तित हो गया.विदेशी भारत पर हावी होते जा रहे थे।  इस समय भारत की खोई हुई पहचान दिलाने के के लिए एक शासक की जरूरत थी. जल्द ही वृहद्रथ को  पुष्यमित्र शुंग नाम का वो महान शासक मिल ही गया.इसी बीच राजा के पास खबर आई कि कुछ ग्रीक शासक भारत पर आक्रमण करने की योजना बना रहे हैं. इन ग्रीक शासकों ने भारत विजय के लिए बौद्ध मठों के धर्म गुरुओं को अपने साथ मिला लिया थाबौद्ध धर्म गुरु राजद्रोह कर रहे थे. भारत विजय की तैयारी शुरू हो गई. वह ग्रीक सैनिकों को भिक्षुओं के वेश में अपने मठों में पनाह देने लगे और हथियार छिपाने लगे.ये खबर जैसे ही पुष्यमित्र शुंग को पता चली, उन्होंने राजा से बौद्ध मठों की तलाशी लेने की आज्ञा मांगी. मगर राजा ने पुष्यमित्र को आज्ञा देने से इनकार कर दियाइस दौरान सेनापति पुष्यमित्र राजा की आज्ञा के बिना ही अपने सैनिकों समेत मठों की जांच करने चले गए. जहां जांच के दौरान मठों से ग्रीक सैनिक पकड़े गए. वहीं, उनका साथ देने वाले बौद्ध गुरुओं को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर राज दरबार में पेश किया गया.पुष्यमित्र शुंग अपंग हो चुके साम्राज्य को दोबारा से खड़ा करना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने एक सुगठित सेना का निर्माण शुरू कर दिया.पुष्यमित्र ने धीरे-धीरे उन सभी राज्यों को दोबारा से  मगध साम्राज्य का हिस्सा बनाया, जो मौर्य वंश की कमजोरी के चलते इस साम्राज्य से अलग हो गए थे एवं  मगध साम्राज्य का विस्तार किय इसके काल में यवनों के आक्रमण का उल्लेख गार्गी संहिता में मिलता है।  उसने  भारत में पैर पसार रहे यवन  शासकों को भारत से खदेड़ा. राजा ने यवन सेना को सिंधु पार तक धकेल दिया. जिसके बाद वह दोबारा कभी भारत पर आक्रमण करने नहीं आएदुश्मनों से आजादी पाने के बाद पुष्यमित्र शुंग ने भारत में शुंग वंश की शुरूआत की और भारत में दोबारा से वैदिक सभ्यता का विस्तार किया. इस दौरान जिन लोगों ने भय से बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था,वह फिर से वैदिक धर्म की ओर लौटने लगे.आयोध्या अभिलेख के अनुसार   भारत में वैदिक धर्म के प्रचार और साम्राज्य की सीमा विस्तार के लिए पुष्यमित्र शुंग ने अश्वमेध यज्ञ भी किया था . भारत के अधिकतर हिस्से पर दोबारा से वैदिक धर्म की स्थापना हुई। उसके राजपुरोहित पतंजलि थे।इस तरह से पूरे हिंदोस्तान में वैदिक धर्म की विजय पताका लहराने वाले पुष्यमित्र शुंग ने कुल मिलाकर 36 वर्षों तक शासन किया था. ब्राह्मण कुल में जन्मे सम्राट थे । आचार्य चाणक्य ने अपने जीवित रहने तक विश्व की प्राचीनतम हिंदू धर्म की वैदिक पद्ति को निभाते हुए मगध की धरती को बौद्ध धर्म के प्रभाव से बचा कर रखा था लेकिन अपनी वीरता, अदम्य साहस और सौर के बल पर पुनः पुष्यमित्र शुंग ने वैदिक धर्म की स्थापना की

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