हमारा वैदिक इतिहास
भाद्रपद (भादो) मास महात्म्य एवं कथा
<p>प्राचीनकाल में एक बड़े प्रतापी राजा थे। उनका नाम नल था। उनकी अत्यंत रूपवती पत्नी थी। उसका नाम था दम्यन्ती। राजा प्रजा का पालन मन लगाकर करते थे। अतः वे स्वंय सुखी थे और प्रजा भी पूर्ण स
विपत्ति की सीमा ही लंघ गयी। राजा-रानी नगर छोड़कर राज्य से बाहर हो गये। जंगल-जंगल घूमने लगे। पति- पत्नी एक तेली के यहाँ पहुँचे। तेली ने दोनों को आश्रय दिया। उसे ज्ञात नहीं था कि ये नल और दमयन्ती हैं। नल को कोल्हू के बैल हाँकने का काम सौंपा और दमयन्ती को सरसों साफ करने का। राजा-रानी ने ये काम कभी किये नहीं थे, अतः उन्हें थकान हो जाती और तेली-तेलिन के कड़वे बोलों का शिकार होना पड़ता।
राजा अपनी अनेक जान-पहचान की जगहों पर भी गया, पर शाप के कारण हर स्थान पर उनका अपमान हुआ। जंगल घूमते-घूमते राजा रानी से बिछुड़ गया। जहाँ-तहाँ भटकने लगा। दमयन्ती जंगल में अकेली रह गयी। बेचारी असहाय महिला क्या करे, क्या ना करे? अन्य मुसीबतें झेल भी ले, पर पति-वियोग की अग्नि से कैसे बचे।
एक दिन रानी की भेंट अचानक ही शरभंग ऋषि से हो गयी। ऋषि द्वारा पूछने पर दमयन्ती ने अपनी विपत्ति-कथा कह सुनायी। शरभंगजी ने दमयन्ती से कहा-पुत्री! तुम गणेशजी की पूजा-अर्चना करो और गणेश चैथ का व्रत करो।
रानी तो साधनहीन थी। ज्यों-त्यों करके उसने गणेश व्रत किया। उस व्रत के प्रभाव से रानी को उसका पति मिल गया और पति को खोया हुआ राज्य मिल गया। राजा-रानी गणेशजी के भक्त हो गये।
भाद्रपद महीने में कई तीज और त्योहार पड़ते हैं, इसलिए हिन्दू कैलेंडर का ये छठा महीना कई तरह से खास है। ये महीना 23 अगस्त से शुरू होके 20 सितंबर तक रहेगा। इस दिन भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि है, जो कि इस महीने का आखिरी दिन होता है। इस महीने की पूर्णिमा पर आकाश में पूर्वा या उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का योग बनने से इस माह का नाम भाद्रपद है। ये चातुर्मास के चार पवित्र महीनों का दूसरा महीना भी है। पवित्र चातुर्मास के अंतर्गत आने से ग्रंथों के अनुसार इस महीने में कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी है।
इस महीने क्या करें और क्या नहीं
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1👉 शारीरिक शुद्धि या सुंदरता के लिए संतुलित मात्रा में पंचगव्य( दूध, दही, घी गोमूत्र, गोबर) का सेवन करें। 2. वंश वृद्धि के लिए नियमित दूध पीएं। 3. पापों के नाश व पुण्य प्राप्ति के लिए एकभुक्त (एक समय), अयाचित (बिना मांगा) भोजन या सर्वथा उपवास करने का व्रत लें। इनका त्याग करें 1👉 मधुर स्वर के लिए गुड़ का त्याग करें। 2👉 लंबी उम्र के लिए व पुत्र-पौत्रादि की प्राप्ति के लिए तेल का। 3.👉 सौभाग्य के लिए मीठे तेल का। 4👉 स्वर्ग प्राप्ति के लिए पुष्पादि भोगों का। 5👉 पलंग पर सोना, भार्या का संग करना, झूठ बोलना, मांस, शहद और दूसरे का दिया दही-भात आदि का भोजन करना, हरी सब्जी, मूली एवं बैंगन आदि का भी त्याग कर देना चाहिए।
क्या सीखना चाहिए इस महीने से
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भाद्रपद चातुर्मास के चार पवित्र महीनों का दूसरा महीना है। चातुर्मास धार्मिक और व्यावहारिक नजरिए से जीवनशैली में संयम और अनुशासन अपनाने का काल है। भाद्रपद मास में हिन्दू धर्म के अनेक बड़े व्रत, पर्व, उत्सव भी मनाए जाते हैं जैसे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेशोत्सव, ऋषि पंचमी, डोल ग्यारस और अनंत चतुर्दशी आदि। इन पर्व, उत्सवों ने सदियों से भारतीय धर्म परंपराओं और लोक संस्कृति को समृद्ध किया है। हिंदू धर्म परंपराओं में इस माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कर्म का संदेश देने वाले भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है तो शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को प्रथम पूज्य देवता श्रीगणेश का जन्मोत्सव होता है। इस प्रकार यह मास कर्म और बुद्धि के संतुलन और साधना से जीवन में सफलता पाने का संदेश लेकर भी आता है।