"ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय | धीमहि तन्नः परशुराम: प्रचोदयात् ||"

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भारत विश्व गुरु है अकाट्य सत्य तथ्य सहित चिन्तन

भारत विश्व गुरु है अकाट्य सत्य तथ्य सहित

22 Aug 2019 पंडित रविन्द्र द्विवेदी जालौन 600
जय श्री परशुराम जी की *विश्व गुरु भारत अकाट्य सत्य* भारत का दार्शनिक चिंतन तह की सतह पर पंहुचा भारतीय चिंतन प्रायः आज की खोज और पुरातन दर्शन में हम क्या अंतर पाते है आइये जाने। पुरातन दर्शन ने प्रकति के तीन गुण बताये सत रज तम और इन्ही के अनुपात में हमारे मनो विकार काम क्रोध मद लोभ मोह मत्सर बने इन्ही का संतुलन मनो निग्रह बना।जो पूरे पृथ्वी में समान रूप से व्यवहारिक अनुभव में देखे जा सकते है विश्व का कोई भी मनो विकार या मनो निग्रह इससे बाहर नही होगा इसी प्रकार शारीरिक रोगों का कारण को केवल वात पित्त कफ का असंतुलन ही बताया गया शरीर का कोई रोग इससे अलग नही होगा।तत्वों में पांच तत्वों में समूचे ब्रह्माण्ड को समेट लिया आकाश वायु अग्नि जल पृथ्वी पुरातन से लेकर आज तक अपरिवर्तित रूप से बना है आधुनिक सभी खोजे अनेक तत्व खोजे और खोज जारी है लेकिन सभी खोजे इसी परिधि में बनी हुई है। पुरातन दर्शन ने दो अनुभूति सुख दुख और एक परा अनुभूति आनंद को बताया जो आज अनुभव किया जा सकता आधुनिक खोज ने अनेक पदार्थ और वस्तुओं के प्राप्त अप्राप्त को सुख दुख ही अनुभव में आते है।प्रकति से परे आनंद जो आत्म निर्भर है उसे भी फक्कड़ महात्माओं में आज भी देखे जा सकते है। आशय ये की आधुनिक खोज कार्य या परिणाम पर खोज कर रही है पर भारतीय दर्शन कारण और सूक्ष्म की खोज कर चुका था सदियो पहले इसी लिए कहा कि सतह की तह पर पहुचने वाला सनातन धर्म सभी जीव जगत का कल्याण की शक्ति रखता है। भारत को विश्व गुरु की महिमा पूरी तरह से अकाट्य सत्य है क्यों की जहाँ एक ओर विश्व पदार्थ की खोज में लगा था वही भारत परमात्मा की खोज कर चुका था,विश्व भौतिक वाद में जुटा था भारत पुरे भू भाग को अपना स्वीकार कर चुका था(वसुदेव कुटुम्बकम),विश्व सीमाओं को तय कर रहा था भारत सभी सीमाओं को स्वयं में समाहित कर सभी को अपना मान सर्वे भवन्तु सुखन: की कामना कर रहा था। अधिक क्या कहूं विश्व जड़ की खोज में व्यस्त था भारत चेतना की खोज पूरी कर चिंतन से चेतना के विकास के शिखर पर पहुच चूका था। इसी कारण भारत अंतर मुखी हो चूका था स्थूल से सूक्ष्म और कारण तक की यात्रा पूरी कर चुका था वहां विश्व आज भी स्थूल जगत में अटका है।इसी लिए भारत विश्व गुरु रहा और है। जहाँ विश्व की अनेक पंथ सभ्यताएं पद और पदार्थ की खोज में जुटी थी वही भारत परम पद व् परमात्मा के नजदीक पहुच चूका था।सच में इस धरा ज्ञान धारा अदि सम्पन्न है।जय भारत भूमि पंडित रविन्द्र द्विवेदी जनपद जालौन संपर्क सूत्र 9451888278
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