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वैदिक संहिताओं के संरक्षण की विधि हमारा वैदिक इतिहास

वैदिक संहिताओं के संरक्षण की विधि

03 Sep 2019 इंo संजय कुमार त्रिवेदी कानपुर 358
प्रश्न- वेदों का संरक्षण किस तरह किया गया? उत्तर :- भगवान् संहितां प्राह,पदपाठं तु रावण: । बाभ्रव्यर्षि: क्रमं प्राह, जटा व्याडीरवोचत् ।१। मालापाठं वसिष्ठश्च, शिखापाठं भृगुर्व्यधात् । अष्टावक्रोऽकरोद्रेखां, विश्वामित्रोऽपठद् ध्वजम् ।२। दण्डं पराशरोऽवोचत्, कश्यपो रथमब्रवीत् । घनमत्रिर्मुनि: प्राह, विकृतीनामयं क्रम: ।३। मधुशिक्षायां मधुसुदनमुनि: अर्थात्- = ईश्वर ने वेदों की संहिता कही , - रावण ने पदपाठ किया , - बाभ्रव्य ने क्रमपाठ का कहा , - जटापाठ व्याडी ने आरम्भ किया , - वसिष्ठ ने मालापाठ, - भृगु ने शिखापाठ आरम्भ किया, - अष्टावक्र ने रेखापाठ की पद्धति प्रारम्भ की , - विश्वामित्र ने ध्वजपाठ आरम्भ किया , - पराशर ने दण्डपाठ किया , - कश्यप ने रथपाठ की प्रणाली आरम्भ की , - अत्रि ने घनपाठ किया । इस तरह संहिता, पद और क्रम के आश्रय से इन विकृतियों के पाठों की प्रणाली इन ऋषियों ने आरम्भ की. यह सब करने का कारण यही था कि, ऐसे पाठ होने से और पदों के आगे-पीछे पठन होने से एक भी "अक्षर" आगे-पीछे नहीं किया जा सकता. यदि अक्षरों का हेर-फेर हो जाय, पद अागे-पीछे बन जाएंगे, तो किसी न किसी समय इन विकृतियों के पाठों में वह हेर-फेर करने वाला पकड़ा ही जाएगा और उसकी निन्दा सब वेदपाठियों में हो जाएगी. इस तरह वेदपाठ की रक्षा का यत्न इत्ने यत्न से इन सभी ऋषियों ने किया था...
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