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शिखा रखने का महत्व हमारा वैदिक इतिहास

शिखा रखने का महत्व

30 Jun 2019 Shyam Shukla Noida 1,113

<p>प्राचीन समय में सिर पर शिखा रखना इतना जरूरी था कि इसे आर्यों की पहचान तक मान लिया गया था लेकिन यह सिर्फ एक मान्यता या परंपरा ही नहीं है वरन् इसे वैज्ञानिक तौर पर भी स्वीकृत किया गया है।

पौराणिक कहानियों में तो हम देखते-सुनते आ ही रहे हैं लेकिन वर्तमान समय में भी प्राय: पुरुषों को शिखा यानि चोटी रखे देखा जा सकता है। विशेषतौर पर ब्राह्मण वर्ग के लोग तो विशेषतौर पर आज भी सिर पर चोटी रखते हैं
प्राचीन समय में सिर पर शिखा रखना इतना जरूरी था कि इसे आर्यों की पहचान तक मान लिया गया था लेकिन यह सिर्फ एक मान्यता या परंपरा ही नहीं है वरन् इसे वैज्ञानिक तौर पर भी स्वीकृत किया गया है। आखिर किस कारण से हमारे पूर्वजों ने सिर पर शिखा रखना इतना जरूरी समझा था। 
1:सिर पर चोटी रखने का सबसे बड़ा और प्रमुख कारण है कि इस स्थान के सीधे नीचे सुषुम्ना नाड़ी होती है, जो कपाल तंत्र के अन्य खुली जगहों (मुंडन के समय) की अपेक्षा ज्यादा संवेदनशील भी होती है।ब्रह्मांडीय विद्युत इस जगह के खुले होने के कारण वातावरण से ऊष्मा और अन्य ब्रह्मांडीय विद्युत-चुंबकीय तरंगें बड़ी ही आसानी से मस्तिष्क के साथ आदान-प्रदान कर सकती हैं।

2:मस्तिष्क के ताप को नियंत्रित करना
ऐसी गतिविधियां मस्तिष्क के ताप को भी बढ़ाती हैं, लेकिन वैज्ञानिक तौर पर मस्तिष्क के ताप को नियंत्रित करना बहुत जरूरी होता है इसलिए इस स्थान का ढका होना जरूरी है।

3:सिर पर शिखा (चोटी) रखकर आसानी से ताप को नियंत्रित किया जा सकता है। यही वजह है कि प्राचीन काल से ही सिर पर चोटी रखने का प्रचलन है।

4:शरीर के पांच चक्र होते हैं, जिसमें से एक है सहस्त्रार चक्र, जो सिर के बीच में होता है। स जगह पर शिखा रखने से यह चक्र जाग्रत होता है, साथ ही बुद्धि और मन भी नियंत्रित रहते हैं।

5:आपको शायद यह पता ना हो लेकिन सिर के जिस भाग पर चोटी रखी जाती है वह स्थान बौद्धिक क्षमता, बुद्धिमता और शरीर के विभिन्न अंगों को नियंत्रित करता है। यह धर्म का परिचायक तो है ही साथ ही साथ मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को सुचारू रखने में सहायक सिद्ध होता है।

6:सिर पर शिखा रखने से मनुष्य योगासनों को भी सही तरीके से कर पाता है, इनमें प्राणायाम, अष्टांगयोग आदि प्रमुख हैं। इसकी सहायता से नेत्रों की रोशनी भी सही रहती है और वह शारीरिक रूप से सक्रिय रहता है।

7:शिखा का दबाव होने से रक्त का प्रवाह रहता है, इसका सीधा लाभ मस्तिष्क को प्राप्त होता है।


8:वे लोग जिनकी परंपरा में ही चोटी रखना समाहित है, वे आधुनिकता की वजह से सिर पर बहुत छोटी सी चोटी रख लेते हैं, जबकि शास्त्रों के अनुसार यह वर्णित है कि चोटी की लंबाई और आकार गाय के पैर के खुर के बराबर होनी आवश्यक मानी गई है।

रूढ़िवादिता की पहचान
आजकल के लोग सिर पर चोटी रखने को रूढ़िवादिता की पहचान मानते हैं लेकिन असल में यह पूर्णत: वैज्ञानिक तरीका है।

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