कार्तवीर्य अर्जुन और कामधेनु का प्रसंग
सहस्रबाहु द्वारा आश्रम पर आक्रमण, और उसके बाद अधर्म के विरुद्ध भगवान परशुराम का संकल्प।
सहस्रबाहु का बल
कार्तवीर्य अर्जुन हैहय वंश का अत्यंत बलशाली सम्राट था, जिसे दत्तात्रेय के वरदान से सहस्र भुजाओं का बल प्राप्त था। उसका शासन विस्तृत था, किंतु बल के साथ अहंकार भी बढ़ा।
आश्रम पर आक्रमण
आखेट के दौरान कार्तवीर्य महर्षि जमदग्नि के आश्रम पहुँचा। कामधेनु के प्रभाव से उसकी समस्त सेना का आतिथ्य सहज हो गया। इससे लुब्ध होकर उसने बलपूर्वक कामधेनु का अपहरण कर लिया।
यह केवल एक गाय का हरण नहीं था — यह राजसत्ता द्वारा तपोभूमि पर किया गया अतिक्रमण था। भगवान परशुराम का प्रतिकार इसी अधर्म के विरुद्ध था, किसी वर्ग के विरुद्ध नहीं।
संकल्प का उद्देश्य
शास्त्रों में स्पष्ट है कि उनका संकल्प उन शासकों के विरुद्ध था जो बल के मद में प्रजा और तपस्वियों पर अत्याचार कर रहे थे। अधर्म समाप्त होते ही उन्होंने शस्त्र त्याग दिया और समस्त भूमि दान कर दी।